भारी बरसात में त्रिपाल के सहारे अंतिम संस्कार किया गया जिला मुख्यालय से 12 किलोमीटर दूर ग्राम कौवा ताल का मामला

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सारंगढ़ – केंद्र और राज्य सरकार मूलभूत सुविधाओं को आमजन तक पहुंचाने का अथक प्रयास तो कर रहा लेकिन उसके बाद भी ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं से वंचित नजर आ रहे है कुछ ऐसे ही एक तस्वीर ने सरकार की सारे विकास के दावे पर प्रश्न चिन्ह खड़े कर दिए है एक त्रिपाल के सहारे दिख रहा इस दुनिया से अंतिम विदाई अंतिम संस्कार ,जिसे देख कर हो जायेगे हैरान हालाकि यह विकास कार्यों बहुत ही छोटी सी है लेकिन बात छोटे कार्य या बड़े कार्यों कि नहीं बात है आमजन को मिलने वाली छोटी सी छोटी मूलभूत सुविधाओं का मसला भारत आज जमीन कि सफर से आसमान तक का सफर तय कर चुका लेकिन आज भी देश में जमीन के विकास कार्य में अब भी पीछे नजर आ रहा कैसे होते है गांव में अंतिम संस्कार की दुख भरी अंतिम यात्रा देखिए गौर से इस तस्वीर को जहा मूलभूत सुविधाओं से आज भी ग्रामीण वंचित नजर आ रहे हैग्रामीणों की लाचारी की एक जीता जीगता तस्वीर जिला मुख्यालय सारंगढ़ बिलाईगढ़ से महज 12 किलोमीटर और विकासखंड मुख्यालय सारंगढ़ से 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम पंचायत कौवाताल है जहा ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसते नजर आ रहे है हजारों की संख्या में ग्रामीण निवासरत है जिनके पास आज भी उस गांव में छोटी छोटी विकास अटका पड़ा हुआ है ग्रामीणों ने एक तस्वीर भेज बताया कि इस हालत में ग्रामीण मुक्तिधाम में भी दुख के साथ त्रिपाल लाना पड़ रहा है गांव में मुक्तिधाम में स्थिति बहुत ही खराब हो चुका है जहा छत तक नहीं सिर्फ खंभे और लोहे की पोल बचा हुआ है इस तरह की परिस्थिति में भी ग्रामीण मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार करने को मजबूर हो रहे है गर्मी था जैसा तैसा चल रहा था लेकिन अब तो बरसात आ चुका आखिर कहा जाए ऐसे दुख की घडी में ग्रामीण की मृत्यु होने कर उन्हे मुक्तिधाम लाया गया जहां उनकी अंतिम संस्कार हो रहा था अचानक मौसम में परिवर्तन के साथ बारिश होना शुरू हो गया जिसमे ग्रामीणों ने अनान फानन में त्रिपाल के सहारे चिता को आग दे रहे ।मूलभूत सुविधाओं को लेकर स्थानीय प्रशासन करे पहल ग्रामीणों को मिल सके सुविधासारंगढ़ क्षेत्र की बात करे तो ग्राम कौवाताल की स्थिति इस हाल में नहीं है ऐसे कई दर्जन गांव मिलंगे जहा मुक्तिधाम जर्जर हालत में दिख जायेगे जहां गर्मी के दिनों में जैसे तैसे कर अंतिम संस्कार किया जा सकता था लेकिन बरसात में तो मुमकिन ही नहीं ऐसे कार्य को ग्राम पंचायत स्तर पर हो तो उसे पंचायत ही ठीक कराकर सुविधाएं दे सकते है और जिसे ग्राम पंचायत से संभव नहीं उन्हे जनपद पंचायत या जिला पंचायत को ध्यान देने की जरूरत है सारंगढ़ में कई दर्जन ग्राम पंचायत या गांव है जहां ग्रामीणों के लिए मुक्तिधाम नहीं है हालाकि इस ओर मनरेगा से कई पंचायतों मे मुक्तिधाम निर्माण का कार्य होते दिखाई दे रहे है लेकिन संख्या बहुत ही कम है कई पंचायत इसके लिए कई आवेदन दे चुके है लेकिन उन्हे ना तो मनरेगा से या किसी मद से अभी तक नहीं मिला है फिलहाल बरसात में ऐसे मुक्तिधाम को देख ग्राम पंचायत या जनपद स्तर पर विशेष रूप से पहल करना चाहिए